Last Updated on 23, January 2026 by JAC Rankers
!! सरस्वती पूजा !!

सरस्वती पूजा (वसंत पंचमी) के पावन पर्व पर यहाँ एक विस्तृत और जानकारीपूर्ण लेख दिया गया है, जो इस त्योहार के हर पहलू को गहराई से समझाता है:
सरस्वती पूजा: ज्ञान, कला और साधना का महापर्व
भारत में ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना का पर्व ‘सरस्वती पूजा’ अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अज्ञानता को त्याग कर ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ने का संकल्प है।
प्रमुख तथ्य और महत्व (Key Highlights)
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तिथि: यह पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जिसे ‘वसंत पंचमी’ भी कहते हैं।
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प्रतीक: माँ सरस्वती के हाथों में वीणा (संगीत), पुस्तक (ज्ञान), और माला (अध्यात्म) उनके संपूर्ण ज्ञान का प्रतीक हैं। उनका वाहन ‘हंस’ विवेक का प्रतीक है, जो दूध और पानी को अलग करने की क्षमता रखता है।
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पीला रंग: इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है। लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले पकवान (जैसे केसरिया भात) बनाते हैं, क्योंकि पीला रंग ऊर्जा, नई शुरुआत और वसंत की फसलों का प्रतीक है।
इतिहास और पौराणिक कथा
सरस्वती पूजा की शुरुआत के पीछे कई प्राचीन मान्यताएँ हैं:
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सृष्टि का प्राकट्य: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तो चारों ओर मौन व्याप्त था। सृष्टि को स्वर और वाणी देने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे माँ सरस्वती प्रकट हुईं। उनके वीणा बजाते ही पूरी सृष्टि में ध्वनि और संगीत का संचार हुआ।
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विद्यारंभ का दिन: प्राचीन काल से ही वसंत पंचमी को बच्चों की शिक्षा शुरू करने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। इसे ‘अक्षर अभ्यास’ या ‘विद्यारंभ संस्कार’ कहा जाता है।
क्यों मनाई जाती है सरस्वती पूजा?
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ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति: छात्र और शिक्षक माँ सरस्वती की पूजा करते हैं ताकि उन्हें कुशाग्र बुद्धि और विद्या का वरदान मिले।
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कला और संगीत का सम्मान: गायक, वादक और कलाकार अपनी कला में निपुणता पाने के लिए इस दिन अपनी साधना माँ को समर्पित करते हैं।
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वसंत ऋतु का स्वागत: यह दिन कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति के खिलने और वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है।
पूजन विधि और परंपराएँ
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प्रतिमा स्थापना: शिक्षण संस्थानों और घरों में माँ सरस्वती की सुंदर प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं।
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कलम और पुस्तक पूजन: इस दिन विद्यार्थी अपनी पुस्तकों और कलम की भी पूजा करते हैं और संकल्प लेते हैं कि वे पूरे वर्ष निष्ठा से पढ़ाई करेंगे।
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पुष्पांजलि: भक्त ‘सरस्वती वंदना’ का पाठ करते हैं और माँ को सफेद या पीले फूल अर्पित करते हैं।
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विसर्जन: पूजा के अगले दिन या शुभ मुहूर्त पर प्रतिमाओं का पवित्र जलाशयों में विसर्जन किया जाता है।
विशेष तथ्य (Quick Facts)
| पक्ष | विवरण |
| प्रिय पुष्प | सफेद कमल और पीले गेंदे के फूल |
| प्रिय भोग | बूंदी के लड्डू, मालपुआ और बेर |
| अन्य नाम | श्री पंचमी, वसंत पंचमी, ऋषि पंचमी |
| क्षेत्रीय प्रभाव | बंगाल, बिहार और झारखंड में यह पर्व एक बड़े उत्सव की तरह मनाया जाता है। |


